सूचना आयुक्त उदय महुरकर बोले, भारत के खिलाफ इस्लामिक देशों को भड़काने पर लगे राजद्रोह

पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणी से इस्लामिक देशों की नाराजगी के बीच सूचना आयुक्त उदय महुरकर ने तल्खी भरे अंदाज में कहा कि भारत को उन नागरिकों की सूची बनानी चाहिए जो इस्लामिक देशों को भड़काने का काम करते हैं। साथ ही ऐसे लोगों पर राजद्रोह का मुकदमा चलाना चाहिए। महुरकर के इस रुख पर सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि सरकार वैधानिक और संवैधानिक संस्थाओं को व्यवस्थित तरीके से नष्ट कर रही है।पूर्व पत्रकार और केंद्रीय सूचना आयुक्त महुरकर ने गुरुवार को ट्वीट करके कहा, ‘देश ने पैंगबर को लेकर उठे विवाद पर कदम उठाए हैं, अब समय आ गया है कि भारत उन भारतीय नागरिकों की सूची बनाए जो भारत के खिलाफ इस्लामिक देशों को भड़काते हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ राजद्रोह का मामला चलना चाहिए।’ उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘यह राष्ट्र विरोधी गतिविधियां हैं। एक कानून लागू करके ऐसे लोगों की संपत्ति को भी जब्त किया जाना चाहिए।’

केंद्रीय सूचना आयुक्त महुरकर ने आक्रामक रुख जारी रखते हुए कहा कि इस्लामिक देशों के समर्थक और वामपंथियों ने उनके ट्वीट पर नीचे कई सवाल उठाए हैं। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि क्या उन्होंने कभी नफरत फैलाने वाले जाकिर नाइक और ईशनिंदा करने वाले एमएफ हुसैन की निंदा की है। उन्होंने सावधान करते हुए कहा कि राष्ट्रीय जनजागरण के नए युग में अब हिंदुओं की कीमत पर एकतरफा पंथनिरपेक्षता और हिंदू-मुस्लिम एकता नहीं होगी।केंद्रीय सूचना आयुक्त महुरकर की बात का विरोध करते हुए प्रशांत भूषण ने कहा, ‘यह सज्जन खुद को एक पत्रकार बुलाते हैं और उन्हें कहीं से सीधे केंद्रीय सूचना आयोग में उतार दिया गया है। आप देख सकते हैं कि यह सरकार कितने व्यवस्थित तरीके से वैधानिक और संवैधानिक संस्थाओं को खत्म कर रही है।’

इसके जवाब में महुरकर ने कहा, ‘ऐसे लोगों की सलाह की जरूरत नहीं है जिन्होंने लगातार राष्ट्रीय हित के खिलाफ जाकर अपनी विचारधारा को ऊपर रखा है। एक लेखक, पूर्व पत्रकार और देशभक्त नागरिक होने के नाते मुझे हक है कि मैं राष्ट्रीय सुरक्षा और इतिहास पर बेबाकी से अपने विचार रखूं। एक सूचना आयुक्त के तौर पर भी मेरे आदेशों को परखा जाना चाहिए जो निष्पक्ष और बिना किसी डर के जारी किए हैं।’ उल्लेखनीय है कि भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नुपुर शर्मा और दिल्ली भाजपा के मीडिया प्रभारी रहे जिंदल की बयानबाजी से भाजपा ने खुद को अलग रखा है। इसके लिए नुपुर को निलंबित किया गया जबकि जिंदल को बर्खास्त किया गया है।

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