अग्निपथ योजना की यह रही पूरी टाइमलाइन, आर्मी वाइस चीफ ने बताया भर्ती से लेकर बटालियन मिलने तक समय

भारत सरकार ने सेना, नौसेना और वायुसेना में सैनिकों की भर्ती के लिए एक नई ‘अग्निपथ योजना’ लागू कर दी है। इसके तहत बढ़ते वेतन और पेंशन खर्च को कम करने के लिए संविदा के आधार पर चार साल के लिए सैनिकों की भर्ती की जएगी, जिन्हें ‘अग्निवीर’ कहा जाएगा। सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडल समिति (सीसीएस) ने इस नई योजना को हरी झंडी भी दे दी है। बुधवार को थलसेना के वाइस चीफ लेफ्टिनेंट जनरल बीएस राजू ने यह साफ कर दिया है कि इस योजना के तहत भर्ती कब से शुरू होगी।बीएस राजू ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, अब से 90 दिन बाद, पहली भर्ती रैली होगी। अब से करीब 180 दिनों के अंदर नए सैनिक 6 महीने की ट्रेनिंग के लिए तैयार हो सकेंगे। और अब से करीब एक साल में अग्निवीरों का पहला बैच बटालियन में शामिल हो सकेगा। यह सिस्टम निरंतर चलता रहेगा।

जवानों की औसत उम्र भी होगी कम

थलसेना के वाइस चीफ ने आगे कहा, अभी सेना में सैनिकों की औसत आयु 32-33 साल है। अग्निपथ योजना के जरिए 8 से 10 साल के अंदर इसे घटाकर 26 साल के करीब किया जा सकेगा। इससे सेना के जवान पहले से ज्यादा फीट रहेंगे। ऐसे में हम कठिन क्षेत्रों में अधिक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने में अधिक सक्षम होंगे। उन्होंने कहा कि इस योजना की यह खूबसूरती है कि इसे बहुत ही स्लो मैनर में पेश किया जा रहा है।

पहले साल में करीब 40000 भर्तियां

वाइस चीफ ने आगे कहा कि पहले साल में हमें करीब 40000 भर्तियां मिल रही है। इन भर्तियों का चयन अखिल भारतीय स्तर पर किया जाएगा। इसके लिए छह महीने की ट्रेनिंग होगी। इसके बाद वे 3.5 साल तक सेवा देंगे। आखिरी के चौथे साल में 25 फीसदी लोगों को सेना में बनाए रखने पर विचार कर रहे हैं, ये वो लोग रहेंगे जिनके बारे में हमें लगता है कि उनमें सेना में बने रहने की नजरिया और योग्यता है।

फिलहाल शॉर्ट सर्विस कमीशन तहत युवाओं की होती है भर्ती

वर्तमान में सेना 10 साल के शुरुआती कार्यकाल के लिए ‘शॉर्ट सर्विस कमीशन’ के तहत युवाओं की भर्ती करती है, जिसे 14 साल तक बढ़ाया जा सकता है। नई योजना का उद्देश्य तीनों सेवाओं के वेतन और पेंशन खर्च को कम करना है, जो तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2022-23 के लिए 5,25,166 करोड़ रुपये के रक्षा बजट में रक्षा पेंशन के लिए 1,19,696 करोड़ रुपए शामिल हैं। राजस्व व्यय के लिए 2,33,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था। राजस्व व्यय में वेतन के भुगतान और प्रतिष्ठानों के रख-रखाव पर खर्च शामिल है।

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