पर्यटननगरी नैनीताल के विकास के लिए अब जमीन खत्म हो गई है। नगर में केवल ढाई एकड़ ही सरकारी जमीन (राजस्व विभाग एवं नगर पालिका परिषद के स्वामित्व वाली) खाली रह गई है। नैनीताल का मास्टर प्लान बना रही एजेंसी ने यह बिंदु अपनी रिपोर्ट में रखा है।
रिपोर्ट के अनुसार, नैनीताल नगर की काफी बड़ी जमीन पर अवैध कब्जे किए गए हैं। जिसे खाली करवाने की भी जरूरत है ताकि आम जनता के हित में विकास योजनाओं का खाका उन जगहों पर तैयार हो पाए। अनुमान है कि 2041 तक नैनीताल की जनसंख्या भी एक लाख तक हो जाएगी।
ऐसे में भविष्य की विकास योजनाओं के लिए जमीन की जरूरत पूरी करने को नैनीताल व आसपास के जंगलों को बड़े पैमाने पर काटना पड़ेगा। ऐसे में वन विभाग ही भूमि उपलब्ध करवाने का एकमात्र जरिया रह जाएगा। आबादी बढ़ने के साथ ही यहां स्वास्थ्य, पेयजल की मांग भी बढ़ेगी। इसका सीधा असर नैनीताल के पर्यावरण पर पड़ेगा।
एजेंसी के नियोजक देवांग पांडे के अनुसार, नैनीताल के मास्टर प्लान में कई अहम बिंदुओं को शामिल किया है। भविष्य में विकास योजनाओं के लिए भूमि की कमी नजर आ रही है। सर्वे में काफी अधिक सरकारी भूमि पर कब्जे भी मिले हैं। रिपोर्ट में सभी बिंदुओं को शामिल किया जा रहा है।
नए पर्यटन स्थल विकसित करने का सुझाव
ग्लोबल वॉर्मिंग को लेकर बढ़ती चिंताएं पहले ही नैनीताल के पर्यावरण को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में विकास योजनाओं के लिए जंगलों को काटना ही एकमात्र विकल्प रह जाएगा। इसलिए नैनीताल नगर पर आबादी का बोझ कम करने का भी सुझाव मास्टर प्लान में शामिल किया है। इसके लिए भीमताल, भवाली, मुक्तेश्वर जैसे छोटे एवं कम विकसित पर्यटक स्थलों में सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
नैनीताल का मास्टर प्लान बनाने का काम काफी तेजी से चल रहा है। यहां भूमि की कमी एक बड़ी दिक्कत है। बढ़ती आबादी के अनुसार यहां पेयजल, आवास एवं स्वास्थ्य सहित अन्य आधारभूत सुविधाएं भी जुटानी होंगी। इसी को लेकर मास्टर प्लान में कवायद की जा रही है।