रानीपोखरी (देहरादून), ठाकुर सिंह नेगी। जब मैंने खिड़की से अंदर देखा तो वो (महेश तिवारी) चाकू से धीरे-धीरे अपर्णा का गला रेत रहा था। यह देखकर मेरा पूरा शरीर कांप उठा। मैं चिल्लाया-महेश भाई ऐसा मत करो, आपको मेरी कसम। दरवाजा खोलो, ऐसा मत करो। यह सुनकर महेश खिड़की की तरफ आया और खिड़की बंद कर दी। मैंने फिर चिल्लाते हुए आसपास के लोगों को बताया और पुलिस को फोन किया।
रानीपोखरी के नागाघेर में सोमवार सुबह घर के अंदर हुए खूनी खेल के प्रत्यक्षदर्शी सुबोध जायसवाल की जुबां से हत्याकांड की कहानी सुनकर हर किसी के रोंगटे खड़े हो गए। पड़ोसी सुबोध ने बताया कि पत्नी ने मुझे कहा कि बिट्टो (अन्न्पूर्णा) आवाज दे रही है कि पापा मम्मी को मार रहे हैं। बकौल सुबोध, मैंने सोचा कि थप्पड़ मार दिया होगा। इस व्यक्ति (महेश) पर मुझे जरा भी शक नहीं था कि वह ऐसी हरकत करेगा। पत्नी ने जोर देकर कहा, बिट्टो बहुत हल्ला कर रही है, आप जाकर देखो। उसके बाद बहुत जोर से चीखने की आवाज आई।
मैं बिस्तर से उठ ही रहा था, दौड़कर गेट पर आया तो ताला लगा था। मैंने गेट से आवाज लगाई, कोई जवाब नहीं मिला। फिर में अपने घर की तरफ से दीवार फांदकर वहां पहुंचा। घर के मुख्य दरवाजे पर आया तो वह भी अंदर से बंद था। मैंने जोर-जोर से दरवाजा थपथपाया, लेकिन किसी ने नहीं खोला। मैं महेश के घर के पीछे अपने घर की बाउंड्री वाली तरफ से गया तो एक खिड़की खुली थी। अंदर झांककर देखा तो जितना मुझे नजर आया, वहां अंदर महेश की पत्नी (नीतू) और अपर्णा दोनों नीचे गिरे थे। बहुत खून बह रहा था। महेश चाकू से धीरे-धीरे अपर्णा का गला काट रहा था। उसने खिड़की बंद की तो मैंने दौड़कर पत्नी और आसपास के लोगों को बताया। मैंने तुरंत रानीपोखरी एसओ को फोन किया। पुलिसकर्मी हमारे घर की तरफ से दीवार फांदकर घर के परिसर में गए। हम लोगों ने पुलिस के साथ मिलकर दरवाजा तोड़ा। अंदर लाशें बिखरी हुई थीं।
बुजुर्ग मां के सामने नरसंहार
सुबोध ने बताया कि जिस समय महेश अपर्णा को मार रहा था, तब बुजुर्ग माता बिस्तर पर कपड़ों की तह लगा रही थीं। बुजुर्ग मां मानसिक रूप से ठीक नहीं थीं। इसलिए कुछ समझ नहीं सकी होंगी कि क्या हो रहा है। जितनी देर में हम लोग पुलिस के साथ दरवाजा खोलकर अंदर पहुंचे, तब तक महेश ने अपनी मां को भी मार दिया था।
आंटी! मेरी मम्मी को बचा लो, पापा मार देंगे…
रानीपोखरी। पड़ोसी सुबोध की पत्नी एवं पूर्व बीडीसी सदस्य गीता ने बताया कि सबसे छोटी अन्नपूर्णा, जिसे हम सब बिट्टो कहकर बुलाते थे, वह छह महीने की थी, तब से उसके साथ लगाव था। सुबह बिट्टो ने आवाज लगाई कि आंटी मम्मी को बचा लो, पापा मार देंगे। हमें लगा कि बच्चे आपस में झगड़ रहे हैं। एक बार लगा कि बरसात का मौसम है, सांप ने तो नहीं काट लिया। मैंने कहा, बाबू गेट खोल दे, मैं तब आऊंगी, दीवार फांदकर नहीं आ सकती। अपने घर की तरफ की दीवार से खिड़की के अंदर झांका तो कुछ दिखाई नहीं दिया। मैं अपने किचन में आई और नाश्ता बनाने में लग गई। फिर दोबारा आवाज आई, मुझे बचा लो, मुझे बचा लो। लगा कि बच्ची तकलीफ में है। मैंने अपने पति सुबोध को कहा कि बिट्टो आवाज लगा रही है, आप जाकर देख लो। मेरे पति ने आवाज लगाई, बिट्टो क्या हुआ तो उसने कहा, मेरी मम्मी को बचा लो, पापा मार रहे हैं। फिर मेरे पति बाउंड्री पार करके गए और दरवाजा पीटा।
हर कोई हैरान! माला जपने वाले हाथों ने कैसे मचाया कत्लेआम
अक्सर माला जपने वाले हाथों ने सोमवार को घर के अंदर ऐसा कत्लेआम मचाया कि सुनकर हर किसी के होश उड़ जाएं। शांत स्वभाव का पूजा-पाठ में लीन रहने वाला व्यक्ति इस तरह से अपने ही परिवार को मार देगा, किसी ने सोचा नहीं था। पड़ोसियों ने पुलिस को बताया कि महेश तिवारी के हाव-भाव देखकर लगता नहीं था कि वह ऐसा कुछ कर सकता है। एसओ शिशुपाल राणा ने बताया कि पहले किसी ने उसका इस तरह का क्रूर व्यवहार नहीं देखा था। वह पड़ोसियों से ज्यादा मिलता-जुलता नहीं था, न इस घर में रहते हुए कभी किसी से उसका झगड़ा हुआ। सुबह और शाम के वक्त रोजाना करीब दो घंटे पूजा करता था। जोर-जोर से श्लोक और मंत्र पढ़ता था। घर के अंदर किचन के पास ही पूजा स्थल बना हुआ था। बाहर जब घर के आंगन में आता था तो एक माला लेकर उसे जपता रहता था। किसी से कभी बात भी करता था तो बहुत सहज तरीके से करता था।
कुछ समय योग केंद्र चला, विदेशी भी आते थे
जिस घर में यह हत्याकांड हुआ, उसका परिसर काफी बड़ा है। मुख्य गेट के बाद आंगन और बगीचा है। उसके बाद मकान और पीछे भी काफी बड़ा परिसर है। खाली जमीन में पेड़ पौधे लगे हैं। पड़ोसियों ने बताया कि शुरुआत में इस परिसर में योग केंद्र चलता था। यहां विदेशी भी आया करते थे। मकान के अंदर भी पांच कमरे हैं। महेश के भाइयों ने योग केंद्र चलाने के लिए ही यह घर लिया था। बाद में योग केंद्र बंद हो गया। हालांकि, योग केंद्र चलने के दौरान भी महेश का परिवार यहीं रहता था।
पक्षियों को दाना, बंदरों को खिलाता था खाना
एसओ राणा ने बताया कि आरोपी महेश प्रकृति और पशु प्रेमी भी था। वह अक्सर घर के आंगन में पक्षियों के लिए चावल के दाने बिखेरकर रखता था। तोतों के लिए फल रख देता था। बंदरों को आंगन में खाना रखकर खिलाता था। घर के आंगन में पेड़-पौधे बहुत हैं, वहां पक्षियों का बसेरा रहता है। पक्षियों को दाना डालना, पशुओं को भोजन कराने में उसे आनंद आता था।