रानीपोखरी के नागाघेर में अपनी मां, पत्नी और तीन बेटियों को मौत की नींद सुलाने वाले महेश कुमार तिवारी की इस क्रूरता का एकमात्र गवाह चैन की नींद नहीं सो पा रहा है। गवाह पड़ोसी सुबोध जायसवाल ने ही महेश को अपराध अंजाम देते हुए देखा था।
तभी से सुबोध जायसवाल इस घटना से अत्यधिक व्यथित हैं। पूरी रात उन्होंने और परिवार ने जागकर काटी। रह रह कर आरोपित महेश की सबसे छोटी नौ वर्षीय बेटी अन्नपूर्णा (बिट्टो) की आवाज उन्हें मदद के लिए पुकारती सुनाई दे रही थी।
सुबोध जायसवाल और उनका परिवार अत्यधिक व्यथित
- रसोई में मदद के लिए अपने पति महेश तिवारी को पूजा से उठाने वाली पत्नी नेहा, अपनी मां और तीन मासूम बेटियों को गला काटकर मौत की नींद सुलाने वाला महेश कुमार तिवारी भले ही सलाखों के पीछे हो।
- इस घटना के चश्मदीद उनके पड़ोसी सुबोध जायसवाल और उनका परिवार अत्यधिक व्यथित है। सुबोध जायसवाल एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने इस घर की खिड़की से इस जघन्य हत्याकांड को अपनी आंखों से देखा था।
- वह हत्यारोपी को बार-बार परिवार को छोड़ देने की गुहार लगाते रहे, मगर महेश तिवारी के सिर पर तो खून सवार था।
- सभी पांच लोगों की जघन्य हत्या करने के बाद ही वह रुका। महेश कुमार तिवारी और सुबोध जायसवाल के घर के भी सिर्फ एक दीवार का फासला है।
- सोमवार की सुबह इस जघन्य हत्याकांड के बाद पूरा दिन पुलिस की जांच और दौड़ भाग में गुजर गया। लेकिन सुबोध जायसवाल की रात काटे नहीं कटी।
- उन्होंने बताया कि महेश की सबसे छोटी बेटी अन्नपूर्णा (बिट्टो) जिसकी उम्र महज नौ साल उनके परिवार के एक सदस्य की तरह थी।
- दिन में जब तक वह दो तीन बार उनके यहां नहीं आ जाती तब तक ना उसे चैन पढ़ता था ना हमारे परिवार को। लेकिन अब हमारा घर भी सूना पड़ गया है।
- सुबोध जायसवाल के परिवार में उनकी पत्नी गीता जायसवाल, बेटा प्रद्युमन और बेटी कृतिका है।
- सुबोध ने बताया कि सोमवार की रात घर के भीतर बार-बार बिट्टो की मदद के लिए पुकार उन्हें सुनाई देती रही।
- काफी सोने की कोशिश की मगर नींद नहीं आई। परिवार के सभी सदस्य एक कमरे में जमा हो गए।
- रात को क्षेत्र में हाथी की आमद हुई तो वह 1:30 बजे घर से बाहर चले गए। जब वापस 3:00 बजे लौट कर आए उसके बाद भी नींद नहीं आई।
- सुबोध जायसवाल का कहना है कि महेश कुमार तिवारी की इस क्रूरता का फैसला भगवान तो करेंगे ही।
- न्यायालय से भी उसे कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए वहां आखरी दम तक लड़ते रहेंगे।
- उन्होंने कहा कि जब तक इस व्यक्ति को न्यायालय से कठोर सजा नहीं मिल जाती, तब तक वह कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
बिट्टो के पद चिह्न आज भी है सुबोध के घर पर
सुबोध जायसवाल ने बताया कि अन्नपूर्णा बिट्टो उनके परिवार के सदस्य की तरह थी। घर में दीपावली के वक्त जब लक्ष्मी माता के पैरों के निशान ऐपण के रूप में बनाए जाते हैं।
हम अपने घर की दीवारों पर अन्नपूर्णा के पैरों के निशान ही बनाते थे। उसे हम लक्ष्मी की तरह मानते थे। हमारे लिए उसके पैरों के निशान अब ताजिंदगी उसकी याद बन गए हैं।
सुबोध का घर बना मायके वालों का आसरा
हत्यारोपी की पत्नी नीतू के मायके से उसकी मां, मौसी, भाई, भाभी और दो ममेरे भाई मंगलवार को यहां आ गए थे। महिलाओं को छोड़कर शेष सभी सदस्य पांच लोगों के अंतिम संस्कार में शामिल हुए। महेश के घर में पुलिस का ताला लगा है। नीतू के मायके से आए सभी लोग सुबोध जायसवाल के घर पर ही रुके हैं।