📰 सेवा भारत टाइम्स |
देहरादून। उत्तराखंड में सहकारी बैंकिंग क्षेत्र ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश के सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य एवं जिला सहकारी बैंकों की 290 शाखाओं ने मिलकर 269.72 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है।
उन्होंने बताया कि बैंकों के कुशल वित्तीय प्रबंधन और सख्त अनुशासन के चलते एनपीए (Non-Performing Assets) में भी सुधार हुआ है। इस वर्ष बैंकों का सकल एनपीए घटकर 650.23 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 6.22% कम है। वहीं, शुद्ध एनपीए भी घटकर 173.65 करोड़ रुपये पर आ गया है।
📊 बढ़ी मुनाफे वाली शाखाओं की संख्या
मंत्री ने बताया कि इस वर्ष 290 बैंक शाखाएं लाभ में रही, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 280 थी। हालांकि, अभी भी 41 शाखाएं घाटे में हैं, जिन्हें लाभ में लाने के लिए विभागीय स्तर पर विशेष रणनीति तैयार की जा रही है।
📍 जनपदवार प्रदर्शन (सकल लाभ)
- देहरादून: 29.11 करोड़
- कोटद्वार: 30 करोड़
- चमोली: 31.79 करोड़
- उत्तरकाशी: 25.12 करोड़
- हरिद्वार: 9.32 करोड़
- ऊधमसिंह नगर: 25.24 करोड़
- नैनीताल: 22.65 करोड़
- टिहरी: 31.12 करोड़
- पिथौरागढ़: 21.65 करोड़
- अल्मोड़ा: 16.91 करोड़
- राज्य सहकारी बैंक: 26.37 करोड़
💻 डिजिटल बैंकिंग और पारदर्शिता पर जोर
डॉ. रावत ने कहा कि सरकार द्वारा अपनाई गई पारदर्शी नीतियों, डिजिटल बैंकिंग सेवाओं के विस्तार और ऋण वितरण प्रणाली में सुधार का सकारात्मक असर देखने को मिला है। समयबद्ध एनपीए वसूली से बैंकों की वित्तीय स्थिति और मजबूत हुई है।
🌱 ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
मंत्री ने कहा कि सहकारी बैंकों का बेहतर प्रदर्शन प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत है। सरकार आने वाले समय में डिजिटल तकनीक, आधुनिक बैंकिंग और मजबूत वित्तीय प्रबंधन पर और जोर देगी, ताकि सहकारी बैंक ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ बन सकें।