उत्तराखंड में भी अलर्ट, लेकिन नए स्वरूप में दोनों टीके कितने कारगर अभी स्पष्ट नहीं
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्तपाल के वरिष्ठ सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ एवं कोरोना के नोडल अफसर डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि कोरोना के दोनों टीके लगाने के बाद भी लोगों को कोरोना संक्रमण हो रहा है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
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कोरोना के नए वेरिएंट ओमीक्रोन पर देशभर में लगाए जा रहे टीके कितने कारगर हैं, इसको लेकर विशेषज्ञ अभी तक कुछ बताने की स्थिति में नहीं हैं। इस पर दुनियाभर के विशेषज्ञ अभी अध्ययन कर रहे हैं।
अभी ज्यादा वैज्ञानिक अध्ययन नहीं हुआ
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्तपाल के वरिष्ठ सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ एवं कोरोना के नोडल अफसर डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि कोरोना के दोनों टीके लगाने के बाद भी लोगों को कोरोना संक्रमण हो रहा है। यहां यह ध्यान देने की बात है कि कोरोना के अब तक के विभिन्न स्वरूप से संक्रमित मरीजों में देखा गया है कि जिन लोगों ने दोनों टीके लगाए हुए हैं, उनमें बीमारी की गंभीरता कम देखी गई है।
अब नया वेरिएंट ओमीक्रोम जो सबसे पहले कुछ दिन पूर्व ही दक्षिण अफ्रीका के मरीज में सामने आया, उसे लेकर वैश्विक स्तर पर अभी कोई ज्यादा वैज्ञानिक अध्ययन नहीं हुआ है। इतना जरूर है कि यह वेरिएंट तेजी से म्यूटेशन कर रहा है। इसका संक्रमण भी तेजी से हो रहा है। जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. राजीव दीक्षित का भी कहना है कि नए वेरिएंट में कोरोना के वर्तमान में मौजूद टीके कितने कारगर होंगे अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है। इसलिए कोविड गाइडलाइन का पालन करना ही सबसे बड़ा हथियार है।
बिना ट्रायल के बूस्टर डोज लगाना उचित नहीं
डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि जिन लोगों के दो डोज लग चुकी है, वह फिलहाल तीसरी बूस्टर डोज न लगाएं। डॉ. अनुराग ने तर्क दिया कि पूर्व में भी देश में हुए सीरो सर्वे में बड़ी आबादी में कोरोना की एंटीबॉडी पाई गई। ऐसे में अभी तीसरी बूस्टर डोज लगाने से शरीर में एंटीबॉडी अत्यधिक बढ़ सकती हैं, जो दूसरी बीमारियों का कारण बन सकती है।
केंद्र और आईसीएमआर से भी अभी तीसरी डोज के लिए कोई सिफारिश नहीं की गई है। अभी इस पर ट्रायल चल रहा है। ट्रायल फाइनल होने के बाद ही कहा जा सकता है कि कोरोना टीके की तीसरी बूस्टर डोज कब और किन को लगानी जरूरी है।
कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनजर देहरादून जिला प्रशासन और पुलिस ने भी कोविड गाइडलाइन का पालन करने वालों के खिलाफ सख्ती शुरू कर दी है। शनिवार को जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने निरंजनपुर मंडी और पलटन बाजार में बिना मास्क पहने और शारीरिक दूरी का पालन न करने वाले 37 लोगों के चालान काटे। इसमें दुकानदारों के साथ ही आमजन भी शामिल हैं।
जिलाधिकारी डॉ. आर. राजेश कुमार ने शुक्रवार को जिले के सार्वजनिक स्थानों, बाजारों, सब्जी मंडियों में मास्क पहनने और शारीरिक दूरी के नियमों का पालन अनिवार्यत: करवाए जाने के निर्देश अधिकारियों को दिए थे। शनिवार को उप जिलाधिकारी सदर मनीष कुमार द्वारा पुलिसकर्मियों के साथ निरजंनपुर सब्जी मंडी का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। इस दौरान मास्क न पहनने और शारीरिक दूरी के नियमों का पालन न करने वाले 17 लोगों के चालान भी किए गए।
एसडीएम सदर ने मंडी सचिव को निर्देशित किया कि वह भी अपने स्तर से मंडी परिसर में मास्क व शारीरिक दूरी का पालन करवाएं। एसडीएम और पुलिस क्षेत्राधिकारी शेखर सुयाल के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने पलटन बाजार में भी औचक निरीक्षण किया। पलटन बाजार में बिना मास्क के घूम रहे 20 लोगों का चालान किया गया।
निरीक्षण के दौरान पुलिस वाहन के माध्यम से कोरोना के बढ़ते खतरों और कोविड नियमों का पालन कराने संबंधी मुनादी भी कराई। दुकानदारों से अपील की गई कि बिना मास्क के घूम रहे खरीददारों को सामान विक्रय न करें। साथ ही दोबारा कोविड नियम तोड़ने पर तय प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
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कोरोना के नए वेरिएंट ओमीक्रोन पर देशभर में लगाए जा रहे टीके कितने कारगर हैं, इसको लेकर विशेषज्ञ अभी तक कुछ बताने की स्थिति में नहीं हैं। इस पर दुनियाभर के विशेषज्ञ अभी अध्ययन कर रहे हैं।
अभी ज्यादा वैज्ञानिक अध्ययन नहीं हुआ
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्तपाल के वरिष्ठ सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ एवं कोरोना के नोडल अफसर डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि कोरोना के दोनों टीके लगाने के बाद भी लोगों को कोरोना संक्रमण हो रहा है। यहां यह ध्यान देने की बात है कि कोरोना के अब तक के विभिन्न स्वरूप से संक्रमित मरीजों में देखा गया है कि जिन लोगों ने दोनों टीके लगाए हुए हैं, उनमें बीमारी की गंभीरता कम देखी गई है।
अब नया वेरिएंट ओमीक्रोम जो सबसे पहले कुछ दिन पूर्व ही दक्षिण अफ्रीका के मरीज में सामने आया, उसे लेकर वैश्विक स्तर पर अभी कोई ज्यादा वैज्ञानिक अध्ययन नहीं हुआ है। इतना जरूर है कि यह वेरिएंट तेजी से म्यूटेशन कर रहा है। इसका संक्रमण भी तेजी से हो रहा है। जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. राजीव दीक्षित का भी कहना है कि नए वेरिएंट में कोरोना के वर्तमान में मौजूद टीके कितने कारगर होंगे अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है। इसलिए कोविड गाइडलाइन का पालन करना ही सबसे बड़ा हथियार है।
बिना ट्रायल के बूस्टर डोज लगाना उचित नहीं
डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि जिन लोगों के दो डोज लग चुकी है, वह फिलहाल तीसरी बूस्टर डोज न लगाएं। डॉ. अनुराग ने तर्क दिया कि पूर्व में भी देश में हुए सीरो सर्वे में बड़ी आबादी में कोरोना की एंटीबॉडी पाई गई। ऐसे में अभी तीसरी बूस्टर डोज लगाने से शरीर में एंटीबॉडी अत्यधिक बढ़ सकती हैं, जो दूसरी बीमारियों का कारण बन सकती है। केंद्र और आईसीएमआर से भी अभी तीसरी डोज के लिए कोई सिफारिश नहीं की गई है। अभी इस पर ट्रायल चल रहा है। ट्रायल फाइनल होने के बाद ही कहा जा सकता है कि कोरोना टीके की तीसरी बूस्टर डोज कब और किन को लगानी जरूरी है।