भारत-चीन सहित एशियाई आठ देशों में घट रहीं ठंडी रातें, वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान शोध में खुले कई राज

विश्व में औसत तापमान की वृद्धि ने हिन्दु कुश और हिमालयी रीजन के देशों को भी चिंतित कर दिया है। इन दोनों रीजन से जुड़े आठ देशों में ठंडी रातों की अवधि कम हो रही है। इसका असर क्षेत्र के तापमान, ग्लेशियर के पिघलने की रफ्तार और प्राकृतिक स्रोतों पर पड़ रहा है। वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक शोधों के मुताबिक, हिन्दु कुश रीजन में हर दस साल में 0.5 दिन के हिसाब से ठंडी रातों की अवधि घट रही है।

जबकि 1.7 गर्म रातें प्रति दस वर्ष में बढ़ रही हैं। वहीं हर दस साल में 1.2 दिन के हिसाब से गर्म दिनों की अवधि भी बढ़ रही है। तापमान वृद्धि का असर हिन्दु कुश, हिमालयी रीजन के आठ देश अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, चीन, नेपाल, म्यांमार, पाकिस्तान और भारत के कुल 3500 किलोमीटर लंबे भूभाग पर पड़ेगा।

इन आठ देशों में कुल 240 करोड़ जनसंख्या निवास करती है। ग्लोबल वार्मिंग के असर से विश्वभर में 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान में औसत बढ़ोतरी की बात सामने आई है, जबकि हिन्दु कुश रीजन में 0.3, हिमालयी रीजन में 0.7 डिग्री सेल्सियस तापमान में औसत वृद्धि का आंकलन है। इससे कराकोरम के मुकाबले सिक्किम, कुमाऊं, गढ़वाल एवं लद्दाख हिमालय के ग्लेशियर (15 मीटर प्रति वर्ष) तेजी से पिघल रहे हैं।

ठंडी रातों की अवधि घट रही
इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) ईसीमोड के शोध के अनुसार, पिछले 50 सालों में हिन्दु कुश रीजन में ठंडी रातों में कमी की प्रवृति रही है। शोध के हवाले से वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने आंकलन किया है कि इस रीजन में 1901 से 1940 के बीच तापमान की वृद्धि सामान्य से नीचे रही है।

1940 से 1970 के बीच औसत तापमान सामान्य से ऊपर गया। जबकि 1998 से 2014 के बीच के वर्ष पिछले 100 सालों में सर्वाधिक गर्म साल रहे। 1901 से 2020 की अवधि में प्रति दस साल में औसत तापमान में 0.19 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि रही। साल 1951 से 2014 की तुलना करें तो इस दौरान औसत तापमान में वृद्धि 0.20 डिग्री सेल्सियस रही।

यूरोप के मौसम ट्रेंड की तुलना भारत से नहीं हो सकती, वहां के मुकाबले हिन्दुकुश क्षेत्र में ग्रीष्म ऋतु ज्यादा लंबी रहती है। लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं, हिंदुकुश रीजन व हिमालयी क्षेत्र में भी तापमान बढ़ रहा है।
डा. कालाचांद साईं निदेशक, वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान

भारत के नजरिए से देखें तो यहां तापमान में विविधता है। भारत में कई शहरों का तापमान यूरोप के वर्तमान तापमान से ज्यादा हैं, यूरोप में हीट वेब कम होती है, जबकि भारत पहले से ही ऐसा तापमान झेल रहा है।
डा. पंकज चौहान, वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक, वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान

खास बातें
-साल 2019 में ब्रिटेन में वेदर सर्विस ने 38.7 डिग्री सेल्सियस तापमान की भविष्‍यवाणी की थी। तीन साल बाद हालात बिगड़ गए हैं।
-फ्रांस के ब्रिटनी क्षेत्र में तापमान 39.3 डिग्री पहुंचा। सितंबर 2003 के बाद हालात बिगड़े। दक्षिण-पश्चिम हिस्‍सों में गर्मी और बढेगी।
-राजस्थान के पलोड़ी में 19 मई 1916 को अधिकतम तापमान 51 डिग्री रिकार्ड किया गया। ये भारत का सर्वाधिक रिकार्डेड तापमान है।

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