UKSSSC भर्ती परीक्षा लीक में उठे कई सवाल

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा से जुड़ी नौकरियां बेचने के मामले में पुलिस ने भले ही कुछ लोगों को गिरफ्तार कर लिया हो, लेकिन सवाल उठ रहा है कि क्या यही सबसे बड़े गुनहगार हैं? 24 घंटे सीसीटीवी की निगरानी में रहने वाले स्ट्रांग रूम तक चंद लोगों की ही पहुंच होती है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आयोग के भीतर से मदद के बिना कोई गड़बड़ी कैसे कर सकता है? अगर प्रेस के स्तर पर कोई गड़बड़ी हुई है तो फिर उस स्तर पर गुनहगारों की शिनाख्त क्यों नहीं की जा रही? हालांकि सूत्र बताते हैं कि प्रेस में पेपर प्रिंटिंग का काम भी आयोग की निगरानी में होता है।

राजनीतिक और बेरोजगारों के संगठनों का कहना है कि आयोग अपनी जिम्मेदारी से किनारा नहीं कर सकता। उनकी सरकार से मांग है कि नौकरियां बेचने वाले बचने न पाएं। सूत्रों के अनुसार आयोग बिल्डिंग में बने स्ट्रांग रूम में सभी परीक्षा संबंधित गोपनीय काम होते हैं। इसमें तीन से चार लोग ही दाखिल हो पाते हैं।

इस कमरे की तीन सीसीटीवी कैमरे से 24 घंटे निगरानी होती है। विभिन्न परीक्षकों से बनवाए गए प्रश्नपत्रों को आपस में मिलाने (जम्बलिंग) का काम कम्प्यूटर से होता है। फिर पेपर, प्रिटिंग के लिए प्रेस में जाता है। इस प्रक्रिया की जानकारी आयोग के दो-तीन लोगों को ही होती है।

सूत्रों के अनुसार इस प्रकरण में गिरफ्तार प्रोग्रामर की इस प्रक्रिया में सीधे कोई भूमिका नहीं थी। किसी भी तरह यदि असल गुनहगार छूट गया तो फिर आगे की परीक्षाएं साफ सुथरी हो पाएंगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है। उधर, मामले में गिरफ्तार छह आरोपियों में दो की मंगलवार को एसटीएफ को रिमांड मिल गई। एक आरोपी को दो दिन और दूसरे को तीन दिन एसटीएफ रिमांड पर लेगी।

प्रिंटिंग प्रेस पर भी रोक
पेपर लीक होने के बाद सकते में आए आयोग ने तकनीकी सेवाएं देने वाली आरएमएस टेक्नोसॉल्यूशन से परीक्षा संबंधित काम छीन लिया है। साथ ही पेपर प्रिंट करने वाली प्रेस पर भी रोक लगा दी है। इसके साथ ही आयोग ने भविष्य में पेपर आउट या नकल करने वालों के खिलाफ राजस्थान की तर्ज पर सख्त कानून बनाने की सिफारिश राज्य सरकार के सामने करने का निर्णय लिया है।

समय पर पूरी हो जांच
आयोग के अध्यक्ष एस राजू ने बताया कि कुछ अभ्यर्थी इस मामले में हाईकोर्ट गए थे, जहां से कोर्ट ने गृह विभाग को दस सप्ताह के अंदर पुलिस जांच पूरी करने को कहा है। इसलिए इस मामले का पटाक्षेप जल्द हो सकता है। राजू के मुताबिक यदि मामला नकल का साबित हुआ तो पूरी परीक्षा खारिज करना, मेहनत से सफल हुए अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होगा। इसलिए पुलिस की अंतिम जांच के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।उत्तराखंड में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी या बैकडोर से भर्ती का इतिहास रहा है। यही कारण है कि कोई भी भर्ती विवादों से अछूती नहीं रही है। इससे मेहनती और प्रतिभाशाली युवाओं का हक मारा जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *