अपनी मां, पत्नी और तीन बेटियों की निर्मम हत्या करने वाले महेश तिवारी को भले ही अपनी इस करतूत पर कोई पछतावा नहीं हो मगर, उसके सबसे छोटे भाई नरेश को सबकुछ देखने के बाद भी अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा है। सूचना पर नरेश घटनास्थल पर पहुंचा। घर के भीतर का मंजर देखकर वह आवक सा रह गया। मां और बच्चों के खून से लतपथ शव देखकर नरेश की चीख निकल गई। जिसके बाद वह निशब्द हो गया।
मूल रूप से उत्तरप्रदेश निवासी महेश कुमार तिवारी चार भाइयों में दूसरे नंबर का है। महेश का सबसे बड़ा भाई उमेश तिवारी योग शिक्षक है और वह वर्तमान में विदेश में कार्यरत है। जबकि महेश के बाद का भाई रमेश तिवारी अपने गांव में रहता है तथा सबसे छोटा भाई नरेश तिवारी भी योग शिक्षक है, जो भारत व विदेश में योग कक्षाएं संचालित करता है। उमेश और नरेश ने ऋषिकेश के निकट तपोवन में ऋषिकेश स्कूल और योग का संचालन करते हैं। नरेश भी कुछ समय पूर्व अमेरिका में था, जो अब लौट आया है और योग स्कूल का काम संभाल रहा है। नरेश ने बताया कि कुछ दिन पूर्व वह मथुरा जाने से पूर्व रानीपोखरी अपने इस घर में आया था, तब उसके भाई महेश ने ही उसे एयरपोर्ट छोड़ा था।
पूछताछ में नरेश ने बताया कि उसका भाई महेश कोई काम नहीं करता था, उसके घर का खर्च सबसे बड़े भाई उमेश तिवारी संभालते थे, जिसके लिए वह प्रत्येक माह उसके बैंक अकाउंट में लगभग 20 हजार रुपये भेजते थे। बताया कि महेश पहले गांव में ही रहता था। कुछ वर्ष पूर्व उनके पिता की मृत्यु हो गई थी। जिसके बाद महेश वर्ष 2015 में ऋषिकेश आ गया। जिसे उनके बड़े भाई उमेश ने रानीपोखरी के नागाघेर में बनाए अपने घर में रख दिया था।
महेश को खरीद कर दिया था वाहन
बिना काम के घर में रहकर पूजा-पाठ करने वाले महेश को कुछ काम देने के लिए उसके भाइयों ने उसे कुछ समय पूर्व एक कार भी खरीदकर दी थी। मगर, नरेश ने बताया कि महेश ने इस रूप में इस कार का उपयोग नहीं किया।
हालांकि उनके योग स्कूल में आने वाले योग साधकों को एयरपोर्ट से स्कूल तक लाने के लिए कभी-कभार महेश इस वाहन का उपयोग करता था। इसके अलावा वह प्रतिदिन अपनी बेटी अपर्णा को भी ऋषिकेश छोड़ने और लेने आता था, जिसके लिए कभी-कभार वह इस वाहन का प्रयोग करता था।