सदन में अग्निपथ योजना को लेकर विपक्ष का हंगामा

सेना में भर्ती की केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना के विरोध में हल्द्वानी में प्रदर्शनकारी युवाओं पर लाठीचार्ज के मुद्दे पर विपक्ष ने सदन से वॉकआउट किया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने लाठीचार्ज के आदेश देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।

हल्द्वानी में शुक्रवार को अग्निपथ योजना के विरोध में प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। इधर विधानसभा के सत्र तक इसकी आहट हुई। विपक्ष ने इस पर चर्चा की मांग की। जब मांग पूरी नहीं हुई तो वेल में आकर हंगामा किया। हवा में कागज फाड़कर लहराए।
विपक्ष सत्र के दौरान लगातार पुलिस की इस बर्बरता पर कार्रवाई की मांग कर रहा था। बाद में इसी मुद्दे के विरोध में विपक्ष ने सदन से वाकआउट कर दिया। सदन के बाहर मीडिया से बातचीत में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि न तो नियम 310 में सूचना स्वीकार हुई और न ही नियम-58 में इस पर चर्चा के लायक समझा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने युवाओं पर हुई बर्बरता के इस महत्वपूर्ण मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया।

हल्द्वानी के विधायक सुमित हृदयेश ने कहा कि हल्द्वानी के जो युवा वर्षों से सेना में भर्ती की तैयारी कर रहे हैं। उनके लिए अचानक अग्निपथ जैसी बेतुकी योजना लाई गई। वह इसके खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे लेकिन पुलिस प्रशासन ने बर्बरता से लाठीचार्ज कर दिया। उन्होंने सरकार से मांग की कि जिस अधिकारी ने भी लाठीचार्ज के आदेश दिए हैं, उन्हें तत्काल हटाया जाए और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई न की तो कांग्रेस जल्द ही हल्द्वानी में इसके खिलाफ बड़ा प्रदर्शन करेगी।

अग्निपथ योजना युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ : माहरा

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने मोदी सरकार की अग्निपथ योजना को देश के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार सेना की गरिमा, परंपरा, अनुशासन की परिपाटी ही नहीं, देश की सुरक्षा से भी खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान भटके नहीं और सरकारी संपत्ति को नुकसान न पहुंचाएं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में माहरा ने कहा कि देश की सीमा पाकिस्तान, बांग्लादेश, चीन और नेपाल से लगी है। ऐसे फैसले लेकर सरकार देश की सुरक्षा को खतरे में डाल रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने अपने आठ सालों के कार्यकाल में जो भी फैसले लिए, उनका खामियाजा देश की आम जनता को भुगतना पड़ा है। नोटबंदी, जीएसटी, कृषि कानून जैसे फैसले इसमें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस फैसले परिणति बिहार, हरियाणा, दिल्ली और यूपी के साथ उत्तराखंड में भी विरोध देखने को मिल रहा है। पत्रकार वार्ता में मथुरादत्त जोशी, विजय सारस्वत, राजीव महर्षि, सूर्यकांत धस्माना, सुम्मितर भुल्लर, गरिमा दसौनी, नवीन जोशी, गोदावरी थापली, दीप बोहरा, उर्मिला थापा आदि उपस्थित थे।
विधानसभा सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

प्रदेश की पांचवीं विधानसभा का ग्रीष्मकालीन सत्र शुक्रवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। चार दिन में चले सत्र में सदन की कार्यवाही 22 घंटे 43 मिनट चली। इस दौरान चार विधेयक पारित हुए। 573 प्रश्न आए, जिनमें से 17 अस्वीकार हुए और तीन विचाराधीन रखे गए। विधानसभा सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद मीडिया से बातचीत में विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने सत्र के संचालन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विधानसभा का चार दिवसीय बजट सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया है। उन्होंने विपक्ष और पक्ष के सभी सदस्यों को सहयोग के लिए धन्यवाद किया।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश हित और जनहित के अनेक विषयों पर सदन में दोनों दलों ने शांति पूर्वक गंभीर चिंतन-मनन किया। सत्र के दौरान विधान सभा को 573 प्रश्न प्राप्त हुए, जिसमें 14 अल्पसूचित प्रश्न में चार उत्तरित हुए। 190 तारांकित प्रश्न में 61 उत्तरित, 339 आताराकिंत प्रश्न में 165 उत्तरित हुए। कुल 17 प्रश्न अस्वीकार हुए और तीन विचाराधीन रखे गए। सभी नौ याचिकाएं स्वीकृत की गईं। नियम 300 में प्राप्त 76 सूचनाओं में से 21 सूचनाएं स्वीकृत हुई। 26 सूचनाएं ध्यानाकर्षण के लिए रखी गई। नियम-53 में 54 सूचनाओं में छह स्वीकृत हुई और 20 ध्यानाकर्षण के लिए रखी गई। नियम-58 में प्राप्त 32 सूचनाओं में 14 को स्वीकृत किया गया। नियम-310  में चार सूचना प्राप्त हुई, जो कि नियम-58 में परिवर्तित की गई।

यह विधेयक हुए पास

-उत्तराखंड विनियोग विधेयक, 2022
-उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950) (संशोधन) विधेयक, 2022
-उत्तराखंड अग्निशमन एवं आपात सेवा, अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा (संशोधन) विधेयक, 2022
-उत्तराखंड उद्यम एकल खिड़की सुगमता और अनुज्ञापन (संशोधन) विधेयक, 2022

सदन पटल पर रखी ये पांच रिपोर्ट

-आर्थिक सर्वेक्षण उत्तराखंड, वर्ष 2021-22 खंड-1
-उत्तराखंड मानव अधिकार आयोग की वार्षिक, विशेष रिपोर्ट, 2012-18 एवं 2018-19
-राज्य के वित्त पर लेखापरीक्षा (कैग रिपोर्ट)
-उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की 20वीं रिपोर्ट
-उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग 2005 की 2017-18, 2018-19 और 2019-20 रिपोर्ट

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