देहरादून | सेवा भारत टाइम्स, प्रदेश में विद्यालयों की नई समय सारणी लागू होते ही शिक्षकों में भारी नाराज़गी देखने को मिल रही है। विभिन्न शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर इस फैसले का विरोध जताया और पुरानी समय सारणी को तत्काल बहाल करने की मांग उठाई।
शिक्षक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार ढौंडियाल और जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) प्रेम लाल भारती को ज्ञापन सौंपते हुए साफ कहा कि नई समय सारणी प्रदेश की भौगोलिक और मौसमी परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है।
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भीषण गर्मी में पढ़ाई कैसे?
ग्रीष्मकालीन समय सुबह 7:45 से दोपहर 2:05 बजे तक निर्धारित किया गया है, जिसे शिक्षकों ने पूरी तरह अव्यवहारिक बताया। उनका कहना है कि दोपहर 1 से 3 बजे के बीच तेज गर्मी के कारण बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।
साथ ही कई स्कूलों में बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी स्थिति को और ज्यादा कठिन बना सकती है।
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सर्दियों में भी खतरा!
शीतकाल में सुबह 8:50 बजे स्कूल खोलने के फैसले पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिक्षकों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में बच्चे दूर-दराज के गांवों से, कई बार जंगलों के रास्ते स्कूल आते हैं, जिससे उनकी सुरक्षा को खतरा बना रहता है।
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मिड-डे मील पर भी असर
नई समय सारणी से मध्याह्न भोजन योजना भी प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। शिक्षकों के अनुसार समय में बदलाव से बच्चों को समय पर भोजन नहीं मिल पाएगा, जिससे उनकी पढ़ाई और दिनचर्या प्रभावित होगी।
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आंदोलन की चेतावनी
शिक्षक संगठनों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
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ये रहे प्रमुख शिक्षक नेता मौजूद
इस दौरान धर्मेंद्र सिंह रावत, रूपक पुरी, योगेश गुप्ता, मधु पटवाल, कमल सुयाल, कुलदीप तोमर, सत्यजीत, शशांक शर्मा, अनुराग चौहान, अनिल नौटियाल, विजय पाल सजवाण, दिनेश डोबरियाल, महावीर सिंह मेहता, गिरीश सेमवाल, सुभाष झिल्डियाल, अर्जुन पंवार, सूरज मंद्रवाल, अश्विनी कुमार भट्ट और सुरक्षा चौहान सहित कई शिक्षक नेता मौजूद रहे।
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