जिला पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद की जिला पंचायत की सियासत में उतरने की अटकलों ने सियासी माहौल गर्मा दिया है। स्वामी के जरिए भाजपा शहजाद और राजेंद्र के तिलिस्म को तोड़ने की कोशिश में है। राज्य की पिछली भाजपा सरकार में हुए फेरबदल के बाद हरिद्वार ग्रामीण के विधायक स्वामी यतीश्वरानंद को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया था।
2022 का चुनाव वह हार गए। अगले चुनाव में अभी पांच साल का वक्त है। लिहाजा उनकी जिला पंचायत अध्यक्ष के रूप में राजनैतिक वापसी की तैयारी हो रही है। जिला पंचायत में भाजपा उनके जरिए सियासी समीकरण साधने की कोशिश में है। बतौर गन्ना मंत्री वह देहात की राजनीति में सक्रिय रहे हैं।
खुद उनका चुनावी क्षेत्र पंचायत में आता है। हरिद्वार जिले की राजनीति में वह भाजपा का संत चेहरा हैं। उनके जरिए बसपा विधायक मोहम्मद शहजाद और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष राजेंद्र चौघरी का वर्चस्व जिला पंचायत में कम करने की कोशिश भी है। राज्य गठन के बाद शहजाद और राजेंद्र चौधरी की जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाने में अहम भूमिका रही। राजेंद्र चौधरी खुद भी जिपं अध्यक्ष रह चुके हैं। राजेंद्र चौधरी पहले कांग्रेस में थे, वह बसपा में शामिल हो चुके हैं।
मेरा परिवार इस बार जिला पंचायत सदस्य का चुनाव नहीं लड़ेगा। समर्थकों को पूरे दम से चुनाव लड़ाया जाएगा।
मोहम्मद शहजाद, विधायक लक्सर
अब तक हम दोनों जिपं में अलग-अलग लड़ रहे थे। अब एक ही पार्टी में हैं। मिलकर पार्टी को मजबूत करेंगे। चुनाव लड़ने का मन तो है, बाकी जैसा पार्टी का आदेश होगा।