महिला ,बेटी रूप में बाबुल की पगड़ी का गरूर हैं तो बहन बनकर भाई की शान

 

एक महिला जहां दो कुलों का गौरव होती है वहीं शिक्षिका बन विद्यार्थियों में ज्ञान की अलख जलाती है।

महिला दिवस पर जागृति वशिष्ठ की कलम से✍️

नवरात्रों में मां के नौ स्वरूपों का पूजन , यत्र नार्यस्तू पूज्यंते रमनते तत्र देवता: की सनातन संस्कृति से पोषित सभ्यता वाले मेरे भारत देश में ,एक महिला ,बेटी रूप में बाबुल की पगड़ी का गरूर हैं तो बहन बनकर भाई की शान, बहू बनकर ससुराल की शोभा है तो पत्नी बनकर पति का अटूट साथ और मां बनकर नवजीवन का आधार है । एक महिला जहां दो कुलों का गौरव होती है वहीं शिक्षिका बन विद्यार्थियों में ज्ञान की अलख जलाती है। लेखिका बन समाज को वास्तविकता का आइना दिखाती है। राजनीति में पदार्पण कर देशहित में निष्पक्ष सहयोगिनी बन जहां देश के प्रति कर्तव्य निर्वाह करती है। वहीं समाजसेवी के रूप में जरूरत मंदो को सहयोग कर समाज के प्रति दायित्व भी पूर्ण करती है। एक महिला जहां गृहस्थी को अपने प्रेम, समर्पण व अनुशासन से सुव्यवस्थित करती है वहीं एक सफल उधमी के रूप में परिवार की अर्थव्यवस्था में भी बराबर की सहयोगिनी सिद्ध होती है। प्रसिद्ध लेखिका महादेवी वर्मा ने कहा था👉 यदि किसी पुरुष में , महिला के गुण आ जाए तो वो देवतुल्य हो जाता है। सत्य ही है। क्युकी एक महिला त्याग, दया, सहनशीलता, जैसे अनगिनत गुणों से लबरेज़ ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना है। सुबह सबसे पहले जागने वाली और परिवार में सबसे बाद में सोने वाली, दिनभर कर्मशील रहने वाली, शक्ति स्वरूपा समस्त मातृशक्तियों को महिला दिवस की शुभकामनाएं✍️ लेखिका👉जागृति वशिष्ठ

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