📰 सेवा भारत टाइम्स | उत्तराखंड स्पेशल रिपोर्ट
देहरादून, 31 मार्च 2026: उत्तराखंड में “अविरल और निर्मल गंगा” का संकल्प अब धरातल पर साकार होता नजर आ रहा है। नमामि गंगे मिशन के तहत राज्य में अब तक 37 परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं, जिससे गंगा की स्वच्छता और प्रवाह में ऐतिहासिक सुधार दर्ज किया गया है।
सीवेज ट्रीटमेंट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
2014 से पहले जहां राज्य की सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता मात्र 18 MLD थी, वह अब बढ़कर 200 MLD हो गई है। इसके तहत प्रदेश में 50 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित किए गए हैं, जो गंगा में गिरने वाले अपशिष्ट जल को रोकने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
155 नालों की टैपिंग पूरी
गंगा में गिरने वाले 170 प्रदूषित नालों में से 155 को टैप कर दिया गया है। शेष 15 नालों के लिए 11 नए STP का निर्माण तेजी से जारी है, जिससे भविष्य में प्रदूषण को पूरी तरह नियंत्रित करने का लक्ष्य है।
डिजिटल मॉनिटरिंग से पारदर्शिता
परियोजनाओं की निगरानी के लिए ‘गंगा पल्स पोर्टल’ और ‘ड्रेन डैशबोर्ड’ जैसे आधुनिक डिजिटल टूल्स का उपयोग किया जा रहा है। ये सिस्टम रियल-टाइम में STP के प्रदर्शन और नालों की स्थिति की निगरानी करते हैं, जिससे जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है।
पहाड़ी क्षेत्रों में अपनाई गई विशेष तकनीक
उत्तराखंड की भौगोलिक चुनौतियों को देखते हुए ‘इंटरसेप्शन एवं डायवर्जन’ तकनीक अपनाई गई है। इसके तहत नालों के पानी को नदी में गिरने से पहले ही रोककर शोधन संयंत्रों की ओर मोड़ दिया जाता है, जो पहाड़ी इलाकों में अधिक प्रभावी साबित हो रहा है।
CPCB रिपोर्ट 2025 में गंगा ‘अप्रदूषित’ घोषित
Central Pollution Control Board की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड में गंगा का जल अब “अप्रदूषित” श्रेणी में शामिल हो गया है।
- BOD स्तर 3 mg/L से कम दर्ज किया गया
- DO स्तर जलीय जीवन के लिए सुरक्षित पाया गया
- जल गुणवत्ता “बहुत अच्छी” से “अच्छी” श्रेणी में
अर्धकुंभ में दिखेगा असर
आगामी अर्धकुंभ में श्रद्धालुओं को पहले से अधिक स्वच्छ और निर्मल गंगा में स्नान का अवसर मिलेगा, जो इस मिशन की सफलता का प्रत्यक्ष प्रमाण होगा।
👉 कुल मिलाकर, नमामि गंगे मिशन ने उत्तराखंड में गंगा संरक्षण के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है।