पिथौरागढ़। उत्तराखंड देवभूमि में आध्यात्मिक पर्यटन का एक और अध्याय शुरू हो गया है। सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में बहुप्रतीक्षित आदि कैलाश और ऊं पर्वत यात्रा का विधिवत आगाज हो गया। धारचूला से एसडीएम आशीष जोशी ने हरी झंडी दिखाकर करीब 200 श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को रवाना किया। यात्रा के शुभारंभ के साथ ही “हर-हर महादेव” के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
📍 यात्रा मार्ग और प्रमुख पड़ाव
धारचूला से शुरू होकर यह यात्रा लगभग 140 किलोमीटर की दुर्गम लेकिन बेहद रमणीय पहाड़ी राहों से गुजरती है—
➡️ गुंजी
➡️ कुटी
➡️ ज्योलिंगकांग (यहां पार्वती सरोवर से आदि कैलाश के दर्शन)
➡️ नाभिढांग (यहां से ऊं पर्वत के दिव्य दर्शन)
🛂 परमिट और सुरक्षा व्यवस्था
अब तक करीब 500 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 350 यात्रियों को इनर लाइन परमिट जारी किए जा चुके हैं। प्रशासन ने यात्रा के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट अनिवार्य किया है।
पुलिस उपाधीक्षक कुंवर सिंह रावत और एसओ हरेंद्र सिंह नेगी ने यात्रियों से पहाड़ी मार्गों पर सतर्कता और यातायात नियमों के पालन की अपील की है।
📈 तेजी से बढ़ रहा आकर्षण
अक्टूबर 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के बाद इस क्षेत्र की लोकप्रियता में जबरदस्त इजाफा हुआ है।
🔹 3 साल पहले: 2,000 से कम पर्यटक
🔹 वर्तमान: 30,000+
🔹 2026 अनुमान: 1 लाख से अधिक पर्यटक
अब आदि कैलाश को कैलाश मानसरोवर के विकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है—
✔️ कम समय (5–7 दिन)
✔️ कम भीड़
✔️ शुद्ध प्राकृतिक और आध्यात्मिक अनुभव
⚠️ ऊंचाई और स्वास्थ्य चुनौती
यह यात्रा 3,000 से 5,500 मीटर की ऊंचाई तक जाती है, जहां ऑक्सीजन की कमी और हाई एल्टीट्यूड सिकनेस का खतरा बना रहता है। इसलिए स्वास्थ्य जांच और सावधानी बेहद जरूरी है।
💰 यात्रा पैकेज और सुविधाएं
यात्रा के पैकेज ₹25,000 से ₹1,00,000 तक उपलब्ध हैं, जिनमें शामिल हैं—
✔️ यात्रा सुविधा
✔️ ठहरने की व्यवस्था
✔️ परमिट और गाइड
🌱 पर्यावरण और रणनीतिक महत्व
बढ़ती पर्यटक संख्या और हेलीकॉप्टर सेवाओं से पर्यावरण पर दबाव की आशंका भी जताई जा रही है। कचरा प्रबंधन और ग्लेशियर क्षेत्रों में मानवीय गतिविधियां चिंता का विषय हैं।
साथ ही, भारत-चीन सीमा के नजदीक होने के कारण यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण है, जहां इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से सेना की गतिविधियां मजबूत हुई हैं।
✨ निष्कर्ष
आस्था, रोमांच और प्रकृति का अनूठा संगम बनी आदि कैलाश–ऊं पर्वत यात्रा अब तेजी से देश-विदेश के श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है। प्रशासनिक तैयारियों के बीच इस यात्रा का आगाज सीमांत क्षेत्र के लिए पर्यटन और अर्थव्यवस्था दोनों में नई उम्मीद लेकर आया है।