नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू करने में बाधा डालना महिलाओं के हक के साथ अन्याय—विधानसभा अध्यक्ष

📍कोटद्वार | संवाददाता उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष एवं कोटद्वार विधायक ऋतु खण्डूडी भूषण ने कोटद्वार-बद्रीनाथ मार्ग स्थित रैलीश रेस्टोरेंट में आयोजित प्रेस वार्ता में विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने संसद में महिलाओं के अधिकारों से जुड़े नारी शक्ति वंदन अधिनियम के क्रियान्वयन में आई रुकावटों को लेकर कड़ी नाराजगी जताई।

🟡 संसद में क्या हुआ?
उन्होंने बताया कि 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र शुरू हुआ, जिसमें 131वां संविधान संशोधन विधेयक पेश किया गया। इसका उद्देश्य वर्ष 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करना था, ताकि महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।

🔴 तीन विधेयक, लेकिन विपक्ष का विरोध
ऋतु खण्डूडी भूषण के अनुसार, इस दिशा में तीन अहम विधेयक सदन में लाए गए थे। इनका मकसद महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करना और अधिनियम के क्रियान्वयन को स्पष्ट करना था।
👉 लेकिन विपक्ष ने इन विधेयकों का विरोध कर उन्हें पास नहीं होने दिया।

⚠️ “महिलाओं की उम्मीदों के साथ अन्याय”
उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं के साथ अन्याय है।

“जब 2023 में यह ऐतिहासिक कानून पास हुआ था, तब सभी दल साथ थे, लेकिन अब वही विपक्ष बाधा बन रहा है।”

👩‍👩‍👧 70 करोड़ महिलाओं का सवाल
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि देश की लगभग 70 करोड़ महिलाएं इस अधिनियम से सीधे प्रभावित होंगी। ऐसे में इसका विरोध महिलाओं के सशक्तिकरण की राह में रुकावट है।

🟢 सरकार का रुख साफ
ऋतु खण्डूडी भूषण ने स्पष्ट किया कि सरकार महिलाओं के अधिकारों को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और भविष्य में इस कानून को लागू करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।

🗣️ जनता देगी जवाब
अंत में उन्होंने कहा कि जनता सब देख रही है और समय आने पर जवाब जरूर देगी।
उन्होंने अपील की कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों पर राजनीति नहीं, बल्कि एकजुट प्रयास होने चाहिए।

📌 निष्कर्ष:
महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण को लेकर संसद में बढ़ा टकराव अब सियासी मुद्दा बनता जा रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा और गर्मा सकता है।

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